प्राणमय कोश की साधना – 6

मुद्रा – विज्ञान मुद्राओं से ध्यान में तथा चित्त को एकाग्र करने में बहुत सहायता मिलती है। इनका प्रभाव शरीर की आंतरिक ग्रन्थियों पर पड़ता है। इन मुद्राओं के माध्यम से शरीर के अवयवों तथा उनकी क्रियाओं को प्रभावित, नियन्त्रित किया जा सकता है। विभिन्न प्रकार के साधना के उपचार क्रमों में इन्हें विशिष्ट आसन, बंध… Read More प्राणमय कोश की साधना – 6

प्राणमय कोश की साधना – 5

तीन बन्ध दस प्राणों को सुसुप्त दशा से उठाकर जागृत करने, उसमें उत्पन्न हुई कुप्रवृत्तियों का निवारण करने, प्राण शक्ति पर परिपूर्ण अधिकार एवं आत्मिक जीवन को सुसम्पन्न बनाने के लिए प्राण-विद्या’ का जानना आवश्यक है। जो इस विद्या को जानता है, उसको प्राण सम्बन्धी न्यूनता एवं विकृति के कारण उत्पन्न होने वाली कठिनाइयाँ दुःख… Read More प्राणमय कोश की साधना – 5

वेदों व वैदिक यज्ञों में हिंसा निषेध

वेदों में मेध , आलभन आदि शब्दों को लेकर कई हिंसात्मक भ्रांतियां फैलाई गयी हैं |  निघंटु मे मेध यज्ञ के पन्द्रह नामों मे से एक नाम है | लोग भ्रान्ति फैलाते हुए इसका अर्थ हिंसा परक कर्म ( नर मेध अश्वमेध आदि ) से लगाते हैं | पर वेदों मे ही यज्ञ के लिए… Read More वेदों व वैदिक यज्ञों में हिंसा निषेध

ब्राह्मण कौन है ? – ( वज्रसूचि उपनिषद् )

वज्रसुचिकोपनिषद ( वज्रसूचि उपनिषद्  ) यह उपनिषद सामवेद से सम्बद्ध है ! इसमें कुल ९ मंत्र हैं ! सर्वप्रथम चारों वर्णों में से ब्राह्मण की प्रधानता का उल्लेख किया गया है तथा ब्राह्मण कौन है, इसके लिए कई प्रश्न किये गए हैं ! क्या ब्राह्मण जीव है ? शरीर है, जाति है, ज्ञान है, कर्म है,… Read More ब्राह्मण कौन है ? – ( वज्रसूचि उपनिषद् )