वेदों व वैदिक यज्ञों में हिंसा निषेध

वेदों में मेध , आलभन आदि शब्दों को लेकर कई हिंसात्मक भ्रांतियां फैलाई गयी हैं |  निघंटु मे मेध यज्ञ के पन्द्रह नामों मे से एक नाम है | लोग भ्रान्ति फैलाते हुए इसका अर्थ हिंसा परक कर्म ( नर मेध अश्वमेध आदि ) से लगाते हैं | पर वेदों मे ही यज्ञ के लिए… Read More वेदों व वैदिक यज्ञों में हिंसा निषेध

ब्राह्मण और ब्राह्मणत्व : आदर्श एवं इसकी गरिमा

|| ब्राह्मणत्व जगेगा तो राष्ट्र जगेगा || वज्रसुचिकोपनिषद के प्रारम्भ में ही ब्राह्मण कौन है इससे सम्बंधित प्रश्न पूछे गये हैं : ब्रह्मक्षत्रियवैश्यशूद्रा इति चत्वारो वर्णास्तेषां वर्णानां ब्राह्मण एव प्रधान इति वेद्वचनानुरूपं स्मृतिभिरप्युक्तम ! तत्र चोद्यमस्ति को वा ब्राह्मणो नाम किं जीवः किं देहः किं जातिः किं ज्ञानं किं आर्म किं धार्मिक इति ||वज्रसूची उपनिषद… Read More ब्राह्मण और ब्राह्मणत्व : आदर्श एवं इसकी गरिमा