The Republic of Philosophy – Our Collective Approach

The Republic of Philosophy विनम्र निवेदन (A Kind Request) राष्ट्र व् विश्व में आध्यात्मिकता को आधुनिक विज्ञान के, सामाजिकता के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुतीकरण आज बहुत आवश्यक है। जिस प्रकार देश के व् विश्व के वामपंथी बुद्धिजीवी देश की ऐतिहासिकता, सांस्कृतिकता , परम्परा, से खिलवाड़ किये जा रहे है, नई पीढ़ी को अनर्गल प्रलाप के साथ बहकाया… Read More The Republic of Philosophy – Our Collective Approach

प्राणमय कोश की साधना – 6

मुद्रा – विज्ञान मुद्राओं से ध्यान में तथा चित्त को एकाग्र करने में बहुत सहायता मिलती है। इनका प्रभाव शरीर की आंतरिक ग्रन्थियों पर पड़ता है। इन मुद्राओं के माध्यम से शरीर के अवयवों तथा उनकी क्रियाओं को प्रभावित, नियन्त्रित किया जा सकता है। विभिन्न प्रकार के साधना के उपचार क्रमों में इन्हें विशिष्ट आसन, बंध… Read More प्राणमय कोश की साधना – 6

प्राणमय कोश की साधना – 5

तीन बन्ध दस प्राणों को सुसुप्त दशा से उठाकर जागृत करने, उसमें उत्पन्न हुई कुप्रवृत्तियों का निवारण करने, प्राण शक्ति पर परिपूर्ण अधिकार एवं आत्मिक जीवन को सुसम्पन्न बनाने के लिए प्राण-विद्या’ का जानना आवश्यक है। जो इस विद्या को जानता है, उसको प्राण सम्बन्धी न्यूनता एवं विकृति के कारण उत्पन्न होने वाली कठिनाइयाँ दुःख… Read More प्राणमय कोश की साधना – 5

प्राणमय कोश की साधना – 4

पांच महाप्राणऔर पांच लघुप्राण   मनुष्य शरीर में दस जाति के प्राणों का निवास है । इनमे से पांच को महाप्राण और पांच को लघुप्राण कहते हैं । प्राण, अपान, सामान, उदान, व्यान यह पांच महाप्राण हैं । नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त, धनञ्जय, यह पांच लघुप्राण हैं । शरीर में कुछ ऐसे भ्रमर हैं, जिनमे… Read More प्राणमय कोश की साधना – 4